राजस्थान: डीग के ब्रज नगर में मंत्रीमंडल की ‘मीठी’ दोस्ती ने बनाया चर्चा का विषय

राजस्थान: डीग के ब्रज नगर में मंत्रीमंडल की ‘मीठी’ दोस्ती ने बनाया चर्चा का विषय

Cabinet Ministers Sweet Friendship

Cabinet Ministers' 'Sweet' Friendship

Rajasthan News: राजनीति के गलियारों में अक्सर खींचतान और औपचारिकताओं की खबरें सुर्खियां बनती हैं, लेकिन शुक्रवार को डीग के ब्रज नगर में एक अलग ही नजारा देखने को मिला , जिसने वहां उपस्थित सभी के चेहरे पर मुस्कान बिखेर कर रख दी.  जिले में नगर पालिका के जरिए आयोजित सात दिवसीय मेले के दौरान दो कद्दावर मंत्रियों के बीच ऐसा स्नेह मिलन देखने को मिला, जिसने पद और प्रोटोकॉल की सारी दूरियां मिटा दीं.

जवाहर सिंह बेढम की 'जलेबे' ने घोली मिठास

मेले में आयोजित कुश्ती दंगल कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा पहुंचे. जहां उनके स्वागत के लिए गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम पहले से ही मौजूद थे. दोनों एक दूसरे बड़े ही आतमीय भाव से जिले के सर्किट हाउस में मिले , जहां लोगों की  नजरे दोनों मंत्रियों पर उस वक्त ठहर गई जब मंत्री बेढम ने औपचारिकताएं किनारे कर, ब्रज की शान माने जाने वाले विशाल 'जलेबा' को अपने हाथों से तोड़कर मंत्री खर्रा का मुंह मीठा कराया. देसी घी से तरबतर इस 'जलेबे' के साथ मंत्रियों के बीच दिखे इस पारिवारिक स्नेह ने वहां मौजूद जनसमूह का दिल जीत लिया. स्थानीय लोगों के बीच यह 'मीठा मिलन" दिनभर चर्चा का केंद्र बना रहा.

क्या है जलेबा

जलेबा (Jaleba) साधारण जलेबी का ही एक विशाल और शाही रूप है. इसे  'जलेबियों का राजा' कह सकते हैं. यह उत्तर भारत, विशेषकर हरियाणा (गोहाना) और राजस्थान (ब्रज क्षेत्र) में अत्यंत लोकप्रिय है.  'जलेबा' आकार में काफी बड़ा होता है. एक जलेबे का वजन अक्सर 250 ग्राम से लेकर 500 ग्राम (आधा किलो) तक होता है. कुछ जगहों पर तो एक किलो का एक ही जलेबा बनाया जाता है.

दंगल में पहलवानों ने दिखाए दांव-पेच

रामनवमी के अवसर पर आयोजित इस दंगल में जहां इन दोनों नेताओं का पारस्परिक स्नेह देखने को मिला. वहीं दूसरी तरफ प्रदेशभर के दिग्गज पहलवानों ने यहां आकर अपनी ताकत और कौशल का प्रदर्शन किया. कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायकों सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे. कुश्ती के अखाड़े में जहां पहलवानों के बीच कड़ा मुकाबला दिखा, वहीं अखाड़े के बाहर मंत्रियों के बीच दिखे इस प्रेम ने ब्रज की 'अपनापन' वाली संस्कृति को जीवंत कर दिया.